निगमित प्रशासन के कोड

निगमित प्रशासन के कोड

संहिता का उद्देश्य

कारपोरेट शासन का संबंध मूल्यगत प्रतिबद्धता तथा नैतिक कारोबारी व्यवहार से है। इसमें निकायगत प्रबंधन के तरीके आते हैं। कंपनी की वित्तीय स्थिति, निष्पादन एवं शासन के विषय में समय पर सही सूचना देना कारपोरेट शासन का महत्वपूर्ण अंग है। इससे निकाय की गतिविधियों एवं नीतियों के प्रति जनता में बेहतर समझ पैदा होती है। परिणामतः निकाय निवेशकों को आकर्षित करने तथा स्टेकहोल्डरों का यकीन एवं विश्वास बढ़ाने में सफल रहता है। एसजेवीएन भारत सरकार एवं हिमाचल प्रदेश सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में कंपनी की स्थापना 24.05.1988 को की गई थी। कंपनी का लाभ कमाने एवं लाभांश देने का रिकार्ड रहा है और भारत सरकार की प्रदत्त पूंजी के 10.03 और इक्विटी का विनिवेश किए जाने से कंपनी 20.05.10 से एनएसई तथा बीएसई पर एक सूचीबद्ध कंपनी बन गई है। सूचीबद्धता अनुबंध तथा सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मार्गनिर्देशों के परिप्रेक्ष में कारपोरेट शासन मानदण्डों की अनुपालना महत्वपूर्ण है। एसजेवीएन में हम कारपोरेट शासन के उसूलों को पूरी तरह अंगीकृत करते हैं और हमारा नजरिया निम्नलिखित उसूलों पर आधारित है:

  • नैतिकतापूर्ण कारोबारी व्यवहार;
  • पारदर्शिता एवं प्रकटीकरण की उच्च दर;
  • कंपनी के आंतरिक प्रबंधन विषयक सही जानकारी;
  • एकमात्र कारोबारी जरूरतों पर आधारित एक सरल एवं पारदर्शी कारपोरेट संरचना;
  • प्रबंधन शेयरधासरकों की पूंजी की न्यासी है स्वामी नहीं।

निदेशक मंडल

कंपनी का मानना है कि इसके कारपोरेट शासन की धुरी निदेशक मंडल है जो यह देखता है कि प्रबंधन कंपनी के सभी स्टेकहोल्डरों के दीर्घावधिक हितों की पूर्ति एवं रक्षा किस तरह करता है। कारपोरेट शासन के उच्चतम मानकों को यकीनी बनाने के लिए एक क्रियाशील, प्रज्ञ एवं स्वतंत्र निदेशक मंडल का होना जरूरी है।

निदेशक मंडल की संरचना

कंपनी का निदेशक मंडल पूर्णकालिक निदेशकों, सरकारी अंशकालीन निदेशकों तथा स्वतंत्र निदेशकों के अधिकतम एवं अपेक्षित मेल से युक्त होगा। कंपनी के एक सार्वजनिक उपक्रम होने क परिप्रेक्ष में निदेशक मंडल में निदेशकों को नियुक्त करने, हटाने के अधिकार भारत सरकार में निहित है। निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशकों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए निदेशक मंडल सदैव प्रयास करेगा। निदेशक मंडल का अध्यक्ष कंपनी का अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक होगा।

जहां तक स्थायी समिति की सदस्यता का सवाल है, कोई भी निदेशक 10 समितियों से ज्यादा का सदस्य नहीं होगा या पूरी कंपनी में पांच समितियों, जिनमें वह एक निदेशक के रूप में है, से ज्यादा का अध्यक्ष नहीं होगा। निदेशक अपनी अन्य निदेशक/अध्यक्ष एवं संबंधी जानकारी कंपनी को वार्ष्क रूप् से देंगे तथा बदलाव, यदि हो, की सूचना तुंत कंपनी को देंगे।

निदेशक मंडल की बैठकें

निदेशक मंडल एक साल में न्यूनतम छह बैठकें करेगा (कंपनी के शेयरधारकों की वार्षिक आम बैठक सहित) तथा किन्हीं भी दो बैठकों के मध्य अधिकतम 3 माह का अंतर होगा। निदेशक मंडल के सभी सदस्यों को निदेशक मंडल की तारीखों की जानकारी समय रहते दी जाएगी। निदेशकों द्वारा एक साल में निदेशक मंडल की न्यूनतम् 50औ बैठकों में भी भाग लेना अपेक्षित है।

निदेशक मंडल को सूचना की उपलब्धता

निदेशक मंडल को कंपनी के अंदर पूरी पहुंच एवं संपूर्ण सूचना होगी। जहां तक निदेशक मंडल के समक्ष कार्यवाही के लिए रखी जाने वाली मदों का संबंध है, एसजेवीएनएल भारत के कंपनी सचिव संस्थान के अनुसचिवीय मानकों (एसएस-1) तथा सूचीबद्धता अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार मामले प्रयोज्य सीमा तक मामले प्रस्तुत करेगा। मामले मुख्यतः निम्नवत हैं:

  • प्रचालनगत वार्षिक योजनाएं तथा नए प्रावधान;
  • पूंजीगत बजट तथा नए प्रावधान;
  • कंपनी के तथा इसकी प्रचालन इकाईयों या कारोबारी घटकों के तिमाही नतीजे;
  • ऑडिट समिति तथा निदेशक मंडल की अन्य समितियों की बैठकों के कार्यवृत्त;
  • मुख्य वित्त अधिकारी तथा कंपनी सचिव की नियुक्ति या को हटाने सहित बोर्ड स्तर से ठीक नीचे के वरिष्ठ अधिकारियों की भर्ती एवं वेतन संबंधी सूचना।
  • विषयक रूप से महत्वपूर्ण कारण बताओ, मांग, अभियोग सूचनाएं तथा दण्ड सूचनाएं।
  • घातक या गंभीर दुर्घटनाएं, जोखिमपूर्ण घटनाएं, कोई प्रदूषक सामग्री या प्रदूषण की समस्या।
  • कंपनी द्वारा या की ओर वित्तीय देयताओं में कोई चूक या कंपनी द्वारा बेचे गए सामान की बड़ी नाअदयगी।
  • ऐसे मुद्दे, जिनका संबंध संभावित, सार्वजनिक या उत्पादन दायित्व संबंधी बड़ी राशि के दावों से है, जिसमें कंपनी के आचरण विषयक दिए गए प्रतिकूल आदेश या निर्णय या दूसरे उपक्रम विषयक व्यक्त ऐसे प्रतिकूल अभियुक्ति शामिल हैं जिनका कंपनी के हितों पर विपरित असर पड़ता हो।
  • किसी संयुक्त उपक्रम या सहभागिता करार का विवरण;
  • सद्भावना, ब्रान्ड इक्विटी या बौद्धिक संपदा के लिए लेनदेन संबंधी कोई बड़ी अदायगी।
  • बड़ी श्रमिक समस्याएं तथा उनके प्रस्तावित हल/वेतन करार, वीआरएस इत्यादि के क्रियान्वयन पर हस्ताक्षर जैसे मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध से मुताबिक कोई महत्वपूर्ण घटना।
  • सामान्य कारोबार से हटकर निवेशों, अधीनस्थ उपक्रमों, परिसंपत्तियों की विषयक बिक्री।
  • विदेशी मुद्रा एक्सपोजर संबंधी तिमाही विवरण तथा प्रतिकूल विनिमय उतार-चढ़ाव, यदि घटित हो, को सीमित करने हेतु प्रबंधन द्वारा किए गए उपाय।
  • किसी नियामक, सांिवधिक प्रकृति या सूचीबद्धता अपेक्षता तथा लाभांश की नाअदायगी, शेयर हस्तांतरण इत्यादि में देरी इत्यादि जैसी शेयरधारक सेवा में गैर-अनुपालना।

निदेशक मंडल की समितियाँ

कंपनी की यह सामान्य नीति है कि निदेशक मंडल सभी निर्णयों पर विचार करेगा। विभिन्न समितियों के समिति सदस्यों के गठन, कार्य सुपुर्दगी, सहयोजन, सेवा की शर्तें तय करने तथा समितियों के अधिकारों का प्रत्यायोजन निदेशक मंडल करता है। समितियों की संस्तुतियां अनुमोदनार्थ कभी भी आवश्यकता होने पर पूर्ण निदेशक मंडल के समक्ष रखी जाएंगी।

इन समितियों में से प्रत्येक की बैठकों की आवृत्ति एवं कार्यसूची निदेशक मंडल के अध्यक्ष द्वारा संबंिधत समितियों के अध्यक्ष से मशविरा करके तय की जाएगी। समितियों की बैठक जब भी जरूरी हुआ आयोजित की जाएगी। बैठकों का कोरम प्रत्येक समिति के प्रावधानों के अनुसार होगा।

ऑडिट समिति

कंपनी की लेखा परीक्षा समिति का मुख्य ध्येय वित्तीय विवरणों में परदर्शिता, सत्यनिष्ठा एवं गुणवत्ता तथा सही समय पर तथा समुचित विवरण सुनिश्चित करने के परिपेक्ष में प्रबंधन की वित्तीय विवरण प्रक्रिया का अनुवीक्षण करना तथा प्रभावी निगरानी तंत्र उपलब्ध कराना है।

ऑडिट समिति जरूरत होने पर समय-समय पर आंतरिक लेखा-परीक्षकों तथा सांिवधिक आडिटरों सहित प्रबंधन के वित्तीय विवरण प्रक्रिया के कार्यों का भी निरीक्षण कर सकती है तथा प्रत्येक द्वारा प्रयुक्त प्रक्रियाओं तथा सुरक्षा उपायों का जायजा लेगी। ऑडिट समिति को, इसको संदर्भित विषयों के भीतर, किसी भी गतिविधि की जांच करने, जरूरी होने पर किसी भी कर्मचारी से सूचना मांगने या जब जरूरी हो तो विशेषज्ञों से बाह्य कानूनी या व्यावसायिक सलाह लेने का अधिकार होगा। न्यूनतम तीन निदेशकों से युक्त ऑडिट समिति एक अर्हताप्राप्त तथा स्वतंत्र ऑडिट समिति होगी। ऑडिट समिति के दो-तिहाई सदस्य स्वतंत्र निदेशक होंगे। ऑडिट समिति के सदस्य वित्तीय रूप से पारंगत होंगे। कम से कम एक सदस्य को लेखा या संबंिधत वित्तीय प्रबंधन का ज्ञान हो। कंपनी सचिव ऑडिट समिति का सचिव होगा। कोरम दो सदस्यों या ऑडिट समिति के सदस्यों का एक तिहाई, जो भी अधिक हो, होगा। हालांिक, कम से कम दो स्तंत्र सदस्यों की हाजरी जरूरी है।

दायित्व एवं अधिकार

ऑडिट समिति के निम्नलिखित दायित्व एवं अधिकार होंगे-

अपने विचारार्थ विषयों के अंदर किसी भी गतिविधि की जांच।

किसी भी कर्मचारी से सूचना प्राप्त करना।

बाह्य कानूनी या अन्य व्यावसायिक सलाह लेना।

जिन्हें यह जरूरी समझे उन संबंिधत विशेषज्ञताधारी बाहरी व्यक्तियों की सेवाएंं लेना।

ऐस प्राधिकारियों, जिन्हें यह जरूरी समझे, को मामलों की सूचना देना। ऑडिट समिति की भूमिका निम्नवत होगी

वित्तीय विवरण की सत्यता पर्याप्तता तथा विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग तथा इसकी वित्तीय सूचना जाहिर करने की प्रणाली की निगरानी करना।

सांिवधिक ऑडिटर को हटाने हेतु सक्षम प्राधिकारी को संस्तुति करना।

ऑडिट फीस तथा सांिवधिक लेखा-परीक्षक द्वारा प्रदत्त किसी अन्य सेवा के लिए फीस की अदायगी के लिए सक्षम प्राधिकारी से सिफारिश करना।

आंतरिक ऑडिटरों तथा लागत ऑडिटरों की नियुक्ति तथा फीस निर्धारण।

वित्तीय विवरणों, लागत ऑडिट रिपोर्टों को निदेशक मंडल के समक्ष पेश करने से पहले प्रबंधन के साथ मुख्यतः निम्नलिखित पर केन्द्रित समीक्षा करनाः

  • लेखीकरण नीतियों तथा व्यवहारों में कोई बदलाव,
  • प्रबंधन के निर्णय के आधार पर मुख्य लेखीकरण प्रविष्टियां।
  • मसौदा ऑडिट रिपोर्ट में कमियां।
  • ऑडिट के परिणामस्वरूप मुख्य समायोजन।
  • संबंिधत प्रचलित धारणाएं
  • लेखा मानकों की अनुपालना।
  • वित्तीय विवरण संबंधी स्टॉक एक्सचेंज तथा कानूनी अपेक्षाएं परी करना।
  • कोई संबंिधत पार्टी से लेनदेन यानि कंपनी का प्रबंधन, उनकी अधीनस्थ कंपनियों या रिश्तेदारों इत्यादि के साथ मूर्त रूपीय ऐाा लेनदेन जिनका कंपनी के हितों से संभावित टकराव होता हो।

प्रबंधन, बाह्य एवं आंतरिक ऑडिटरों के साथ आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की पर्याप्तता की समीक्षा करना।

आंतरिक आडिट विभाग की संरचना, विभाग प्रमुख की वरिष्ठता तथा स्टाफिंग, रिपोर्टिंग संरचना, आंतरिक आडिट की कवरेज एवं आवृत्ति।

किसी महत्वपूर्ण निष्कर्ष या तत्संबंधी अनुवर्ती कार्यवाही पर आंतरिक ऑडिटरों से चर्चा करना।

आंतरिक ऑडिटरों द्वारा उन मामलों, जिनमें धोखाधड़ी, अनियमितता या आंतरिक नियंत्रण की किसी बड़ी विफलता की आंशका है, की किसी आंतरिक जांच के निष्कर्षों की समीक्षा तथा मामले की सूचना निदेशक मंडल को देना।

ऑडिट शुरू होने से पहले बाह्य ऑडिटरों के साथ चर्चा करना तथा ऑडिट का कार्यक्षेत्र तथा किसी चिन्तनीय विषय का पता लगाने के लिए ऑडिट के पश्चात चर्चा करना।

कंपनी की वित्तीय एवं जोखिम प्रबंधन नीतियों की समीक्षा।

जमाकर्त्ताओं, शेयरधारकों तथा ऋणदाताओं को अदायगी में बड़ी चूक (घोषित लाभांश की गैर-अदायगी के मामले में) के कारणों को देखना।

ऑडिट समिति द्वारा समीक्षा हेतु उचित समझी जाने वाले कोई अन्य गतिविधि जो कंपनी के सर्वोत्तम हित में हो।

पारिश्रमिक समिति

पारिश्रमिक समिति सार्वजनिक उपक्रम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी अनुदेशों/निर्देशों के अनुसार कंपनी के कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते संबंधी प्रस्तावों सहित मानव संसाधन के सभी प्रस्तावों को निपटाएगी तथा निदेशक मंडल की अपेक्षित मंजूरी के सभी प्रस्ताव अपनी सिफारिशों के साथ निदेशक मंडल के समक्ष रखेगी। समिति स्वतंत्र निदेशक की अध्यक्षता में गठित की गई है। समिति के अन्य सदस्य सरकारों से नामित एक निदेशक तथा एक और स्वतंत्र निदेशक होंगे। फंक्शनल निदेशक यानि निदेशक (कार्मिक) तथा निदेशक (वित्त) विशेषतः आमंित्रत होंगे। बैठक का कोरम 20 सदस्यों या समिति के सदस्यों, एक तिहाई, जो अधिक हो, का होगा। कंपनी सचिव समिति के सचिव होंगे। समिति की बैठक जरूरत पड़ने पर होगी।

निवेश नीति समिति

निवेश नीति समिति कंपनी के निवेश के नीतिगत मामलों को निपटाएगी तथा निवेश समिति को समय-समय पर अपने कार्यों के लिए सलाह देगी। समिति के अध्यक्ष स्वतंत्र निदेशक होंगे। समिति में भारत सरकार के निदेशक मंडल कें प्रतिनिधि के रूप में एक सदस्य, हिमाचल प्रदेश के निदेशक मंडल में प्रतिनिधि के रूप में एक सदस्य तथा कंपनी के निदेशक (वित्त) से युक्त होगी। कंपनी सचिव समिति के सचिव होंगे। समिति की बैठक जरूरत पड़ने पर होगी।

निवेश समिति

निवेश समिति भारत सरकार के अनुदेशों तथा निदेशक मंडल द्वारा मंजूर मार्ग-निर्देशों के मुताबिक अधिशेष निधि का सावधि जमा के रूप में बैंकों में निवेश करेगी। ये समिति अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, निदेशक (वित्त) तथा निदेशक मंडल द्वारा यथा मंजूर एक और फंक्शनल निदेशक से युक्त होगी। निवेशित राशि तथा कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए लिए गए ऋणों की एक तिमाही रिपोर्ट ऑडिट समिति तथा निदेशक मंडल के समक्ष रखी जाती है।

आबंटन तथा आबंटनोत्तर गतिविधियों हेतु समिति

यह समिति शेयर आबंटन, प्रमाण-पत्र जारी करने, आबंटन पत्र, ट्रंसमिशन, रिमैटिरीलाइजेशन, डूप्लीकेट प्रमाण-पत्र जारी करने, कंसोलिडेशन स्प्लीट् तथा अन्य किसी संबंिधत कार्य को निपटाएगी। समिति में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा दो फंक्शनल निदेशक होंगे। बैठक के लिए कोरम दो सदस्यों का होगा।

अधिकार प्राप्त समिति

समिति निदेशक मंडल द्वारा 30.08.2008 को हुई अपनी 173वीं बैठक में समिति को प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करके संिवदात्मक मामलों को मंजूर करेगी। समिति में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा दो फंक्शनल निदेशक होंगे। समिति के लिए कोरम अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, निदेशक (वित्त) तथा संबंिधत निदेशक का होगा।

निवेशगत शिकायत समिति

समिति निवेशकों की शेयर आबंिटत न करने, शेयर डिबेंचर या अन्य किन्हीं सिक्यूरिटियों की ट्रंसफर या ट्रंसमिट करने, घोषित लाभांश प्राप्त न होने, कंपनी के तुलन-पत्र इत्यादि तथा लिस्टिंग अनुबंध में समय-समय पर जब भी संशोधन होने पर निहित किए गए अन्य किसी कार्य को भी निपटाएगी। समिति में दो स्वतंत्र निदेशक तथा एसजेवीएन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक होंगे।

वार्षिक रिपोर्ट

अन्य बातों के साथ-साथ वार्षिक रिपोर्ट कंपनी अधिनियम, सेबी मार्गनिर्देशों, एनएसई एवं बीएसई के साथ लिस्टिंग अनुबंध(धों) तथा " कारपोरेशन शासन " सेक्शन में सूचना सहित निदेशक मंडल रिपोर्ट विषयक इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज ऑफ इंिडया द्वारा जारी प्रासंिगक अनुसचिवीय मानकों में यथोल्लिखित यथा लागू तथा यथा प्रासंिगक विवरण से युक्त होगी।

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